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Saturday, January 23, 2010

ग़ालिब कहते हैं...

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सब कुछ हो रहा है इस तरक्की के ज़माने में
मगर ये क्या गज़ब है के आदमी इन्सां नहीं होता

या तो दीवाना हँसे या तू जिसे तौफीक दे
वरना इस ज़माने में रह कर मुस्करा सकता है कौन?

Monday, August 17, 2009

आराम करो आराम करो



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आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इस से ना तपेदिक होता है
आराम सुधा की एक बूँद तन का दुबलापन खोता है
आराम शब्द में राम छिपा जो भव बंधन को खोता है
आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है
इस लिए तुम्हे समझाता हूँ मेरे अनुभव से काम करो
ये जीवन यौवन क्षणभंगुर आराम करो आराम करो

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गोपाल प्रसाद व्यास

Friday, July 3, 2009

जो बीत गई सो बात गई

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जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वो टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिटटी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है

-बच्चन

Wednesday, January 21, 2009

ग़ालिब कहते हैं...

ज़िन्दगी तेरी हर बात पे समझौता करूँ
शौक जीने का है पर इतना तो नही

जो मुड़ के भी ना देखे एक बार को
ऐसी मगरुर तमन्नाओं का पीछा ना करो

मैं खुदा था गर होता ना कोई मुद्दा
मेरी आरजूओं ने मुझे बन्दा कर दिया