Friday, July 3, 2009

जो बीत गई सो बात गई

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जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वो टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिटटी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है

-बच्चन

1 comment:

Prashant said...

off the records, the last time I broke a glass at a bar, they charged me 100 bucks :)